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Bhrun Hatya In Hindi Essay Book

भारत में कन्या भ्रूण हत्या एक बहुत महत्वपूर्ण विषय है जिसे स्कूल शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों को उनकी परीक्षा के दौरान पूरा निबंध अथवा एक या दो पैराग्राफ लिखने के लिये दिया जा सकता है। भारत में कन्या भ्रूण हत्या पर निबंध लेखन और कुछ पैराग्राफ यहाँ दिये गये हैं। दिये गये सभी निबंध और पैराग्राफ बेहद सरल और विभिन्न शब्द सीमाओं में उपलब्ध है। जिसका प्रयोग विद्यार्थी किसी भी प्रतियोगी या स्कूली परीक्षा के दौरान अपनी जरुरत के अनुसार कर सकता है।

कन्या भ्रूण हत्या पर निबंध (फीमेल फोएटिसाइड एस्से)

Get here some essays on Female Foeticide in easy Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, and 400 words.

कन्या भ्रूण हत्या पर निबंध 1 (100 शब्द)

1990 में चिकित्सा क्षेत्र में अभिभावकीय लिंग निर्धारण जैसे तकनीकी उन्नति के आगमन के समय से भारत में कन्या भ्रूण हत्या को बढ़ावा मिला। हालांकि, इससे पहले, देश के कई हिस्सों में बच्चियों को जन्म के तुरंत बाद मार दिया जाता था। भारतीय समाज में, बच्चियों को सामाजिक और आर्थिक बोझ के रुप में माना जाता है इसलिये वो समझते हैं कि उन्हें जन्म से पहले ही मार देना बेहतर होगा। कोई भी भविष्य में इसके नकारात्मक पहलू को नहीं समझता है। महिला लिंग अनुपात पुरुषों की तुलना में बड़े स्तर पर गिरा है (8 पुरुषों पर 1 महिला)। अगले पाँच वर्षों में अगर हम पूरी तरह से भी कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगा दें तब भी इसकी क्षतिपूर्ति करना आसान नहीं होगा।

कन्या भ्रूण हत्या पर निबंध 2 (150 शब्द)

केवल इसलिये कि जन्म लेने वाला बच्चा एक एक लड़की है, माँ के गर्भ से गर्भावस्था के 18 हफ्तों बाद स्वस्थ कन्या के भ्रूण को हटाना कन्या भ्रूण हत्या है। माता-पिता और समाज एक लड़की को उनके ऊपर एक बोझ मानते है और समझते है कि लड़कियां उपभोक्ता होती हैं जबकि लड़के उत्पादक होते हैं। प्राचीन समय से ही लड़कियों के बारे में भारतीय समाज में बहुत सारे मिथक हैं कि लड़कियां हमेशा लेती हैं और लड़के हमेशा देते हैं। वर्षों से समाज में कन्या भ्रूण हत्या की कई वजहें रहीं है। हालांकि, नियमित तरीके से उठाये गये कुछ कदमों के द्वारा इसे हटाया जा सकता है:

  • चिकित्सों के लिये मजबूत नीति संबंधी नियमावली होना चाहिये।
  • हरेक को लिंग परीक्षण को हटाने के पक्ष में होना चाहिये और समाज में लड़कियों के खिलाफ पारंपरिक शिक्षा से दूर रहना चाहिये।
  • दहेज प्रथा जैसी समाजिक बुराईयों से निपटने के लिये महिलाओं को सशक्त होना चाहिये।
  • सभी महिलाओं के लिये तुरंत शिकायत रजिस्ट्रेशन प्रणाली होनी चाहिये।
  • आम लोगों को जागरुक करने के लिये कन्या भ्रूण हत्या जागरुकता कार्यक्रम होना चाहिये।
  • एक निश्चित अंतराल के बाद महिलाओं (महिलाओं की मृत्यु, लिंग अनुपात, अशिक्षा और अर्थव्यवस्था में भागीदारी के संबंध में,) की स्थिति का मूल्यांकन होना चाहिये।

कन्या भ्रूण हत्या पर निबंध 3 (200 शब्द)

प्राचीन समय से ही, महिलाओं को भारतीय समाज में अपने परिवार और समाज के लिये एक अभिशाप के रुप में देखा जाता है। इन कारणों से, तकनीकी उन्नति के समय से ही भारत में बहुत वर्षों से कन्या भ्रूण हत्या की प्रथा चल रही है। 2001 के सेंसस के आंकड़ों के अनुसार, पुरुष और स्त्री अनुपात 1000 से 927 है। कुछ वर्ष पहले, लगभग सभी जोड़े जन्म से पहले शिशु के लिंग को जानने के लिये लिंग निर्धारण जाँच का इस्तेमाल करते थे। और लिंग के लड़की होने पर गर्भपात निश्चित होता था।

1990 के आरंभ में लिंग निर्धारण परीक्षण का केन्द्र अल्ट्रासाउंड तकनीक का विकास था। भारतीय समाज के लोग लड़के से पूर्व सभी बच्चियों को मारने के द्वारा लड़का प्राप्त करने तक लगातार बच्चे पैदा करने के आदी थे। जनसंख्या नियंत्रण और कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिये, कन्या भ्रूण हत्या और लिंग निर्धारण जाँच के बाद गर्भपात की प्रथा के खिलाफ भारतीय सरकार ने विभिन्न नियम और नियमन बनाये। गर्भपात के द्वारा बच्चियों की हत्या पूरे देश में एक अपराध है। चिकित्सों द्वारा यदि लिंग परीक्षण और गर्भपात कराते पाया जाता है, खासतौर से बच्चियों की हत्या की जाती है तो वो अपराधी होंगे साथ ही उनका लाइसेंस रद्द कर दिया जाता है। कन्या भ्रूण हत्या से निज़ात पाने के लिये समाज में लड़कियों की महत्ता के बारे में जागरुकता फैलाना एक मुख्य हथियार है।


 

कन्या भ्रूण हत्या पर निबंध 4 (250 शब्द)

कन्या भ्रूण हत्या क्या है

अल्ट्रासाउंड स्कैन जैसी लिंग परीक्षण जाँच के बाद जन्म से पहले माँ के गर्भ से लड़की के भ्रूण को समाप्त करने के लिये गर्भपात की प्रक्रिया को कन्या भ्रूण हत्या कहते हैं। कन्या भ्रूण या कोई भी लिंग परीक्षण भारत में गैर-कानूनी है। ये उन अभिवावकों के लिये शर्म की बात है जो सिर्फ बालक शिशु ही चाहते हैं साथ ही इसके लिये चिकित्सक भी खासतौर से गर्भपात कराने में मदद करते हैं।

कन्या भ्रूण हत्या के कारण

कन्या भ्रूण हत्या शताब्दियों से चला आ रहा है, खासतौर से उन परिवारों में जो केवल लड़का ही चाहते हैं। इसके पीछे विभिन्न धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक और भावनात्मक कारण भी है। अब समय बहुत बदल चुका है हालांकि, विभिन्न कारण और मान्यताएं कुछ परिवार में आज भी जारी है।

कन्या भ्रूण हत्या के कुछ मुख्य कारण हैं:

  • आमतौर पर माता-पिता लड़की शिशु को टालते हैं क्योंकि उन्हें लड़की की शादी में दहेज़ के रुप में एक बड़ी कीमत चुकानी होती है।
  • ऐसी मान्यता है कि लड़कियां हमेशा उपभोक्ता होती हैं और लड़के उत्पादक होते हैं। अभिवावक समझते हैं कि लड़का उनके लिये जीवन भर कमायेगा और उनका ध्यान देगा जबकि लड़की की शादी होगी और चली जायेगी।
  • ऐसा मिथक है कि भविष्य में पुत्र ही परिवार का नाम आगे बढ़ायेगा जबकि लड़किया पति के घर के नाम को आगे बढ़ाती हैं।
  • अभिवावक और दादा-दादी समझते हैं कि पुत्र होने में ही सम्मान है जबकि लड़की होना शर्म की बात है।
  • परिवार की नयी बहु पर लड़के को जन्म देने का दबाव रहता और इसी वजह से लिंग परीक्षण के लिये उन्हें दबाव बनाया जाता है और लड़की होने पर जबरन गर्भपात कराया जाता है।
  • लड़की को बोझ समझने की एक मुख्य वजह लोगों की अशिक्षा, असुरक्षा और गरीबी है।
  • विज्ञान में तकनीकी उन्नति और सार्थकता ने अभिवावकों के लिये इसको आसान बना दिया है।

 

कन्या भ्रूण हत्या पर निबंध 5 (300 शब्द)

परिचय

केवल एक लड़की होने की वजह से उसका समय पूरा होने के पहले ही कोख़ में एक बालिका भ्रूण को खत्म करना ही कन्या भ्रूण हत्या है। आंकड़ों के अनुसार, ऐसा पाया गया है कि पुरुष और महिला लिंगानुपात 1961 में 102.4 पुरुष पर 100 महिला, 1981 में 104.1 पुरुषों पर 100 महिला, 2001 में 107.8 पुरुषों पर 100 महिला और 2011 में 108.8 पुरुषों पर 100 महिला हैं। ये दिखाता है कि पुरुष का अनुपात हर बार नियमित तौर पर बढ़ रहा है।

भारत में वहन करने योग्य अल्ट्रासाउंड तकनीक के आने के साथ ही लगभग 1990 के प्रारंभ में ही कन्या भ्रूण हत्या शुरुआत हो चुकी थी।

भारत में 1979 में अल्ट्रासाउंड तकनीक की प्रगति आयी हालांकि इसका फैलाव बहुत धीमे था। लेकिन वर्ष 2000 में व्यापक रुप से फैलने लगा। इसका आंकलन किया गया कि 1990 से, लड़की होने की वजह से 10 मिलीयन से ज्यादा कन्या भ्रूणों का गर्भपात हो चुका है। हम देख सकते हैं कि इतिहास और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के द्वारा कन्या भ्रूण हत्या किया जा रहा है। पूर्व में, लोग मानते हैं कि बालक शिशु अधिक श्रेष्ठ होता है क्योंकि वो भविष्य में परिवार के वंश को आगे बढ़ाने के साथ ही हस्तचालित श्रम भी उपलब्ध करायेगा। पुत्र को परिवार की संपत्ति के रुप में देखा जाता है जबकि पुत्री को जिम्मेदारी के रुप में माना जाता है।

प्रचीन समय से ही भारतीय समाज में लड़कियों को लड़कों से कम सम्मान और महत्व दिया जाता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, खेल आदि क्षेत्रों में लड़कों की तरह इनकी पहुँच नहीं होती है। लिंग चयनात्मक गर्भपात से लड़ने के लिये, लोगों के बीच में अत्यधिक जागरुकता की जरुरत है। “बेटियाँ अनमोल होती हैं” के अपने पहले ही भाग के द्वारा आम लोगों के बीच जागरुकता बढ़ाने के लिये टी.वी पर आमिर खान के द्वारा चलाये गये एक प्रसिद्ध कार्यक्रम ‘सत्यमेव जयते’ ने कमाल का काम किया है। जागरुकता कार्यक्रम के माध्यम से बताने के लिये इस मुद्दे पर सांस्कृतिक हस्तक्षेप की जरुरत है। लड़कियों के अधिकार के संदर्भ में हाल के जागरुकता कार्यक्रम जैसे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं या बालिका सुरक्षा अभियान आदि बनाये गये हैं।


 

कन्या भ्रूण हत्या पर निबंध 6 (400 शब्द)

परिचय

गर्भ से लिंग परीक्षण जाँच के बाद बालिका शिशु को हटाना कन्या भ्रूण हत्या है। केवल पहले लड़का पाने की परिवार में बुजुर्ग सदस्यों की इच्छाओं को पूरा करने के लिये जन्म से पहले बालिका शिशु को गर्भ में ही मार दिया जाता है। ये सभी प्रक्रिया पारिवारिक दबाव खासतौर से पति और ससुराल पक्ष के लोगों के द्वारा की जाती है। गर्भपात कराने के पीछे सामान्य कारण अनियोजित गर्भ है जबकि कन्या भ्रूण हत्या परिवार द्वारा की जाती है। भारतीय समाज में अनचाहे रुप से पैदा हुई लड़कियों को मारने की प्रथा सदियों से है।

लोगों का मानना है कि लड़के परिवार के वंश को जारी रखते हैं जबकि वो ये बेहद आसान सी बात नहीं समझते कि दुनिया में लड़कियाँ ही शिशु को जन्म दे सकती हैं, लड़के नहीं।

कन्या भ्रूण हत्या का कारण

कुछ सांस्कृतिक और सामाजिक-आर्थिक नीतियों के कारण पुराने समय से किया जा रहा कन्या भ्रूण हत्या एक अनैतिक कार्य है। भारतीय समाज में कन्या भ्रूण हत्या के निम्न कारण हैं:

  • कन्या भ्रूण हत्या की मुख्य वजह बालिका शिशु पर बालक शिशु की प्राथमिकता है क्योंकि पुत्र आय का मुख्य स्त्रोत होता है जबकि लड़कियां केवल उपभोक्ता के रुप में होती हैं। समाज में ये गलतफहमी है कि लड़के अपने अभिवावक की सेवा करते हैं जबकि लड़कियाँ पराया धन होती है।
  • दहेज़ व्यवस्था की पुरानी प्रथा भारत में अभिवावकों के सामने एक बड़ी चुनौती है जो लड़कियां पैदा होने से बचने का मुख्य कारण है।
  • पुरुषवादी भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति निम्न है।
  • अभिवावक मानते हैं कि पुत्र समाज में उनके नाम को आगे बढ़ायेंगे जबकि लड़कियां केवल घर संभालने के लिये होती हैं।
  • गैर-कानूनी लिंग परीक्षण और बालिका शिशु की समाप्ति के लिये भारत में दूसरा बड़ा कारण गर्भपात की कानूनी मान्यता है।
  • तकनीकी उन्नति ने भी कन्या भ्रूण हत्या को बढ़ावा दिया है।

नियंत्रण के लिये प्रभावकारी उपाय:

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि महिलाओं के भविष्य के लिये कन्या भ्रूण हत्या एक अपराध और सामाजिक आपदा है। भारतीय समाज में होने कन्या भ्रूण हत्याओं के कारणों का हमें ध्यान देना चाहिये और नियमित तौर पर एक-एक करके सभी को सुलझाना चाहिये। लैंगिक भेदभाव की वजह से ही मुख्यत: कन्या भ्रूण हत्या होती है। इसके ऊपर नियंत्रण के लिये कानूनी शिकंजा होना चाहिये। भारत के सभी नागरिकों द्वारा इससे संबंधित नियमों का कड़ाई से पालन करना चाहिये। और इस क्रूरतम अपराध के लिये किसी को भी गलत पाये जाने पर निश्चित तौर पर सजा मिलनी चाहिये। चिकित्सों के इसमें शामिल होने की स्थिति में उनका स्थायी तौर पर लाइसेंस को रद्द करना चाहिये। गैरकानूनी लिंग परीक्षण और गर्भपात के लिये खासतौर से मेडिकल उपकरणों के विपणन को रोकना चाहिये। उन अभिवावकों को दण्डित करना चाहिये जो अपनी लड़की को मारना चाहते हैं। युवा जोड़ों को जागरुक करने के लिये नियमित अभियान और सेमिनार आयोजित करने चाहिये। महिलाओं का सशक्तिकरण होना चाहिये जिससे वो अपने अधिकारों के प्रति अधिक सचेत हो सकें।

 

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क्या आप कन्या भ्रूण ह्त्या के बारे में जानना चाहते  हें?

क्या आप कन्या भ्रूण हत्या पर निबंध लिखना चाहते हें?

अगर हाँ, तो आईए जानते हें की कन्या भ्रूण हत्या के कारण समाज में क्या क्या अनियमितता फैल रहा  है|

विषय सूचि

कन्या भ्रूण ह्त्या क्या है? What is Female Foeticide?

आधुनिक वैज्ञानिक आविष्कार जैसे की अल्ट्रासाउंड स्कैन के द्वारा माँ के गर्व से होने वाली बच्चे कि लिंग परिक्षण करके उससे ये पता लगाना की होने वाला बच्चा लड़का है या लड़की, और अगर लड़की हुई तो उसे गर्व से ही ख़त्म करने को कन्या भ्रूण हत्या कहा जाता है | भ्रूण हत्या एक गंभीर अपराध के साथ साथ आने वाली पीढ़ी के लिए चिंता का विषय है|

हम कन्या भ्रूण हत्या को देश की आधुनिक तकनीक का एक अंजाम तो कह सकते हें, लेकिन इस अंजाम को रंगने वाली हमारी दक्क्यानुसी सोच का हम क्या करें? सवाल बहोत हें लेकिन जवाब आज भी अनसुल्झा है कि ये समस्या मॉडर्न तक्निक के कारण जन्माया या फिर पुराने खयालात के कारण|

कन्या भ्रूण हत्या पर निबंध हिंदी: Essay On Female Foeticide In Hindi:

दोस्तों, निचे नीले रंग में दिया हुआ अंश “कन्या भ्रूण हत्या पर निबन्ध या भाषण” है| इसका आप ज्यों का त्यों अपने भाषण या निबंध में इस्तेमाल करें| इस विषय में अधिक जानकारी के लिए नीले अंश के निचे कन्या भ्रूण हत्या के बारे में कई रोचक तथ्य दिए गए हें | उन्हें पढना मत भूलिए|

माँ की गर्व में ही पलते बच्चे की गैर कानूनी तरीके से लिंग की परिक्षण करना, और अगर पलते शिशु लड़की है तो उसे गर्व में ही ख़त्म कर देना को कन्या भ्रूण हत्या कहा जाता है| कन्या भ्रूण हत्या लड़की को जन्म से पहले ही मार देना होता है|

कन्या भ्रूण हत्या समाज में बड़े ही तेजी से फ़ैल रहा है| इसे कानूनि स्वीकृति न मिलने के कारण कई डॉक्टर और क्लिनिक के मदद से गैर कानूनी रूप से अंजाम दिया जा रहा है| लेकिन ये अभ्यास छुपे छिपे भी बड़ी तादार्द में सफल हो रहा है, और साथ ही में हमारे समाज के लिए एक चिंता की विषय बन रहा है|

हर समाज और देश में लड़कियों की उतनी ही अहमियत होना चाहिए जितनी की लड़कों की| लेकिन हमारे आस पास की कई मंद बुद्धिजीवी इस बात को हजम करने के लिए तैयार ही नहीं हैं| और इसी कारण कन्या भ्रूण हत्या को बढ़ावा मिल रहा है| 

कन्या भ्रूण हत्या से समाज में लड़कियों की तादार्द लगातार घट रहा है| लड़कों के मुकाबले लडकियां बहोत ही कम संख्या में मौजूद हें| अगर इसी तरह अगर कन्या भ्रूण हत्या को बढ़ावा मिला, तो वह दिन दूर नहीं जब हमारे समाज में लडकियां ना के बराबर हो जाएँगे और समाज की गति पर एक रोक सा लग जायेगा| 

कन्या भ्रूण हत्या के तेज गति के पीछे कहीं न कहीं हम सब जिम्मेदार हें|  हमे सबसे पहले अपने घरों में अपने बच्चों को लड़कियों की अहमियत और लड़कियों की आदर करना सिखाना चाहिए| लडकियों की सोच और इच्छाओं की हमे आदर करना चाहिए| लड़कियों को एक बोझ न समझ के उन्हें अपनी सुख दुःख में भागीदारी बनाना चाहिए| देश में सख्त से सख्त कानूनी व्यवस्था बनानी चाहिए| कन्या भ्रूण हत्या से जुडीत हर डॉक्टर और क्लीनिकों की रजिस्ट्रेशन बंद कर देनी चाहिए| उन माता पिताओं के लिए सख्त से सख्त सज़ा की व्यवस्था करनी चाहिए जो अपने बच्चे को जन्म लेने की अधिकार से बंचित करते हें|

कन्या भ्रूण हत्या के मुख्य कारण, लड़कियों को समाज या घर की बोझ मानना है | हमारे समाज में कई परिवारों में लड़कियों को लड़कों के मुकाबले कम ही अहमियत मिलती है| उनकी परवरिश से लेकर पढाई तक, और जिंदगी की हर मोड़ पर कुछ न कुछ पाबंदी जरुर लगाई जाती है| लडकियों को उनकी मन की बात को खुली तरह से पेश करने की भी अनुमति नहीं मिलती है|

कई बार लड़कियों पर इसी तरह की पाबंदी और भेदभाव के पीछे कई कारण होते हें| कारण होती है लोगों की दक्क्यानुसी मानसिकता का| 

कई घरों में आर्थिक अभावों के चलते लड़कियों की शादी के वक़्त मुसीबत आते हें| ऊपर से समाज केदहेज प्रथा (पढ़िए दहेज प्रथा पर निबंध हिंदी में) इन मुसीबतों को और बढ़ावा देती है| शादी की वक़्त दहेज की परिभासा गरीब माँ बाप को झकझोर के रख देती है| इसी दहेज प्रथा के कारण कन्या भ्रूण हत्या को बढ़ावा मिल रहा  है|

लेकिन हर समस्या का समाधान भी है| अगर हम दहेज प्रथा की विरोध करें तो हम कन्या भ्रूण हत्या पर कई हद् तक लगाम लगा सकते हें| कन्या भ्रूण हत्या को हम सामाजिक जागरूकता फैला कर कुछ हद तक कम कर सकते हें| लेकिन इसकी पूरी तरह से खात्मा करने के लिए सबसे पहले हमें अपने मानसिकता में इंसानियत लानी होगी| हमे लड़कियों को लड़कों के बराबर समझ के चलना होगा|

आईए हम सब आज अभी से कन्या भ्रूण हत्या को सख्ती से विरोध करें और एक स्वच्छ समाज का गठन करें|

                                                                                 धन्यवाद !!

कन्या भ्रूण हत्या-एक गंभीर विषय: Female Foeticide- A Serious Concern:

कहने को तो हम 21वी शदी के रहने वाले हें, जो कि मॉडर्न साइंस की अनमोल आविष्कारों की बड़ी बड़ी बातें करते हें| आधुनिक युग के पीढ़ी हैं जो की अपने सारा काम व कारोबार इन्टरनेट के माध्यम से देखते हें | घंटो सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हें और न जाने अपने आप को कितना ही सफल और उंच सोच रखने वाले मानते हें|

लेकिन आज भी हमारे समाज में कन्या भ्रूण हत्या जैसे दक्कियानुसी सोच पनपता है जो कि हमारे इन सारे मॉडर्न युग के बातों को खोख्ला कर जाता है | हमें पहले से और पिछला युग का बना देता है |

इस देश में कन्या भ्रूण हत्या का सिलसिला करीब 2 या 3 दसक पहले से चल रहा है| ये सिलसिला तब शुरु हुआ जब देश की मेडिकल साइंस ने “अल्ट्रासाउंड” जैसी तकनीक का उपयोग करना शुरु किया| दरअसल इस अल्ट्रासाउंड तक्निक् का  आविष्कार माँ के गर्व में पलते बच्चे की स्वास्थय अवस्था की जांच के लिए की गयी थी, लेकिन समय के चलते और कुविचार के कारण आज इसी तकनीक का इस्तेमाल माँ के गर्व से शिशु की ह्त्या व गर्वपात के लिए किया जा रहा है|

कन्या भ्रूण हत्या सच में एक गंभीर समस्या है, हमारे और हमारे आने वाले पीढ़ीओं के लिए| न जाने हम ये क्यूँ भुल जाते हें कि जिस नारी की हम अपमान करते हें, कन्या शिशु की जन्म से पहले ही हत्या कर देते हें, वही औरत जात हि हमारे समाज को आगे बढाने वालि एक मात्र सहारा है| एक नारि की हत्या से हम कई नारियों कि जन्म पर रोक लगा दे रहे हें|

कन्या भ्रूण हत्या हमारी समाज और आगे की पीढ़ीओं के लिए क्या अंजाम लायेगा, ये शायद हम और आप अंदाजा भी नही लगा सकते हें|

कन्या भ्रूण हत्या के आंकड़े: Female Foeticide Statistic:

कन्या भ्रूण ह्त्या जो की आज कल तेज़ी से मानव समाज में पनपता है, हमारे लिये चौंकाने वाले आंकड़े ला रहे हें जो की आगे हमारे समाज मे एक गम्भिर विषय बनने वाली है| आंकड़ो के अनुसार, सन 1961 में पुरुष लिंगानुपात 102.4 पुरुष पर 100 महिलाए थी, जो की 1981 में 104.1 पुरुष पर 100 महिलाऐं हुई, और 2001 में 107.8 पुरुष पर 100 महिलाऐं बनी, 2011 में 108.8 पुरुष पर 100 महिलाऐं हें|

अभी देखे आंकड़े काफी चोंकाने वाले हें, लेकिन ये आंकड़े आगे फिर बढ़ सकती हें अगर हम आज से नहीं बल्कि अभी से कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अपना जंग का एलान नहीं किये तो|

जानिए कन्या भ्रूण हत्या के कारण: Reasons Behind Female Foeticide:

भारत में कन्या भ्रूण हत्या केवल गरीब के घर पनपता हुआ कीड़ा नहीं है, ये प्रथा अमीरों को भी अपने काबू में करने में सक्षम हो चुका है| इसमें भेद भाव के पीछे सांस्कृतिक नियमों के साथ साथ सामाजिक नियमों का भी बड़ा योगदान है|

लड़कियों को उपभोक्ता और लड़कों को उत्पादक का सोच ही कन्या भ्रूण हत्या के मूल कारण है|

कन्या भ्रूण हत्या को जड से मिटाने के लिए हमें इन नियमों को कड़ी चुनौती देना होगा |

कन्या भ्रूण हत्या से जुडी कुछ एहम कारण हें:

  1. कन्या भ्रूण हत्या को आज भी बढ़ावा मिलता है सदियों से चलती आई दहेज प्रथा के लिए |

दहेज प्रथा (पढ़िए दहेज प्रथा पर निबंध हिंदी में) समाज में कई प्रकार की अनियमितता और जुर्म को जन्म दे रही है| लड़की की माता पिता कई बार लड़की को जन्माने में हिचकिचाते हैं| ये उनका लड़कियों के खिलाफ नापसंदगी नहीं, बल्कि उस लड़की की शादी के वक़्त दहेज प्रथा जैसे जुर्म से लढने की हिम्मत न जूटा पाने की वजह है|

गरीब और असहाय माता पिता गरीबी के कारण कई बार अपनी परिवार की ठीक तरह से पालन नहीं कर पाती| गरीबी के ऊपर जब दहेज का शैतान नाचने लगता है तब शायद ही किसी को कोई रास्ता दीखता है| इसी डर के कारण लड़कियों को समाज में एक बोझ भी माना जाता है| इन सारे परिस्तिथियों के कारण कन्या भ्रूण हत्या को हवा मिलती है|

2. लड़कियों को लड़कों के बराबर नहीं सोचा जाता |

हमारे समाज के कई परिवारों में लड़कियों को लड़कों के तरह आजादी नही मिलती| लड़कियों को घर के काम काज तक ही सिमित रखा जाता है| उन्हें उनकी सोच रखने की भी कई बार अनुमति नहीं मिलती| लड़कियों की जिंदगी की हर अहम् फैसले बिना उनकी मर्जी जाने ली जाती है| बस उन्हें जीने की छूट दी जाती है| इस तरह की सोच और लडकियो के प्रति व्यवहार समाज में लड़कियों कि अहमियत को घटा देती है| लड़कियों के प्रति इस तरह की गुस्सा कई परिवारों मे छाप छोड़ जाती है| और इसी तरह लड़कियों की चाहिदा कम हो जाती है, और पनपती है कन्या भ्रूण हत्या|

लड़कियों लड़कों के बराबर हें| लड़का लड़की सामान (पढ़िए लड़का और लड़की एक सामान पर निबंध हिन्दी मे ) हें|

3. केवल एक बेटा हि माँ बाप के बुढापे का सहारा है जैसी पिछड़ा हुआ सोच|

आज के इस मॉडर्न युग में भी हमारा समाज लड़का लड़का में अंतर करना नहीं भुलापाया है| लड़का और लड़की को एक सामान नहीं माना जाता है| परिवारों में बीटा और बेटी में फर्क किया जाता है| हमें लडका और लड़की को एक समान (पढ़िए लडका लड़की एक समान या बेटा बेटी एक समान पर निबंध हिंदी में) देखना चाहिए| कई परिवारों में लडकों को ही घर का सहारा माना जाता है| लड़कों को ही कमाने वाले माने जाते हें| लड़कियों को बंदिशों में रखा जाता है| लड़कों को ही माँ बाप का सहारा माना जाता है| इसी लिए कन्या भ्रूण हत्या कों हवा मिलता है|

कन्या भ्रूण हत्या का समाज पर प्रभाव और नुक्सान: Female Foeticide- A Social Evil:

कन्या भ्रूण हत्या हमारे समाज को कहीं नहीं लेकिन एक अँधेरे कोने में ले आएगा जहां से किसी भी दिशा में जाना मुमकीन नहीं होगा|

संयुक्त राष्ट्र ने हाल ही में ये जारी किया है की भारत में बढती कन्या भ्रूण हत्या एक चिंता की विषय है जो कि आगे जा के देश में कई तरह के जुर्म को जन्म देगा| समाज में कम महिलाओं की वजह से सेक्स से जुडी हिंसा के साथ साथ बाल अत्याचार और बाल विवाह को भी जगह मिल जायेगा|

कन्या भ्रूण हत्या मानव तस्करी का सबसे बड़ा कारण बन जाएगा जो कि कई जिंदगिओं को नर्क से भी बत्तर बना देगा और फिर जन्म लेगा हिंसा, अपमान और अपमान की बदला का भावना जो एक खुशहाल समाज को हिंसावादी समाज में बदलने के लिए देर नहीं लगाऐगा| वक़्त रहते हमें सतर्क हो जाना होगा|

लड़कियों की समाज में एहमियत: Importance of Girls in Society:

ये उन अभिभावकों के लिये शर्म की बात है जो की लड़कियों को अपना बोझ मानते हें| लड़कियों को लड़कों के बराबर नहीं समझते| उन्हें समाज में कभी ऊँची दर्ज़ा नहीं देते|

आज के युग में लडकियां लड़कों से किसी भी एंगल में कम नहीं हें| लडकियां लड़कों को कंधे से कंधा का टक्कर दे रहे हें|

न जाने हम ये क्यूँ भूल जाते हें की वह लडकियां ही हें जो हमारे समाज को आगे बढाते हें, हमारे परिवार को आगे बढाते हें,एक लड़की ही है जो की एक लड़के को जन्माती है, वरना दुनिया कभी बढ़ता ही नहीं और मानव समाज लोप हो जाता और न रहते  हम और न ये आधुनिक वैज्ञानिक आविष्कारें, जो आज कल मानव समाज में लिंग परिक्षण का दर्ज़ा निभा रहे हें|

नारी में धर्य, साहस, सहनशीलता जैसी अनमोल गूण हैं जो की मानव समाज को बाँध के रखने में एक एहम किरदार निभाती है| हुमेंलाद्कियों कीज्ज़त करनी चाहिए| 

कन्या भ्रूण हत्या पर रोक कैसे लगायें? How to Stop Female Foeticide?

भारत में 1990 में अल्ट्रासाउंड जैसे तकनीक के आगमन के बाद से कन्या भ्रूण हत्या ने जोर पकड़ ली है| आज कन्या भ्रूण जैसी अपराध हमे छोटे छोटे गाँव से लेकर बड़े बड़े सहरों में भी देखने को मिल रहा है| ये केवल अनपढ़ लोगों तक ही सिमित नहीं है| कन्या भ्रूण हत्या को सहरी पढ़े लिखे होने वालों के घर में भी बड़ी अशानी से छाव मिल रहा है| 

सरकार के बार बार विज्ञापन और सख्त कानूनी व्यवस्था के बावजूद कन्या भ्रूण हत्या अपना असर समाज में बनाने में सफल हो रही है|

कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाने के लिए हमें कई बड़ी और अहम् कदम उठाने होंगें| जैसे की-

  1. नियमित रूप से कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ हमें अपना अवाज़ उठाना चाहिए |
  2. स्कूल व कॉलेज में बच्चों को कन्या भ्रूण हत्या के कारण समाज में आगे पनपने वाले खतरों के बारे में पढ़ाना चाहिए|
  3. नियमित अंतरण में गाँव और छोटे शहारों के लोगों को कन्या भ्रूण हत्या से सामाजिक नुक्सान के बारे में अवगत करना चाहिए|
  4. लड़कों को लड़कीयों के प्रति सम्मान और आदर सिखाना चाहिए |
  5. देश के क़ानून को कन्या भ्रूण हत्या को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त क़ानून बनाना चाहिए|
  6. इन्टरनेट वो सोशल मीडिया को कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अपना आवाज़ पहुँचाने का माध्यम बनाना चाहिए|

और सबसे जरूरी की हमें सबसे पहले अपने आपको कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अवगत कराना है|

जानिए कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ बने क़ानून: Laws Again Female Foeticide:

कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए देश के सरकार ने कड़ी से कड़ी क़ानून व्यवस्था भी बनायी है| लेकिन इन सब के बावजूद कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाना अभी पूरी तरह से कामयाब नहीं हो पाया है| रोज़ हम इस प्रकार के अपराध के बारे में अवगत तो होते हें, लेकिन इन अपराधों के खिलाफ अपना आवाज़ उठाने में कई बार हिचकिचाते हें|

प्रसवार्थ निदान तकनिकी अधिनियम 1994

लिंग की जांच और जांच के बाद गर्व की ह्त्या के खिलाफ क़ानून:

गर्व में पलते लिंग की जांच करना या करवाना, सब्दों या इशारे में लिंग की परिचय करना, गर्व की पात करना या उससे जुडी किसी भी सोच को बढ़ावा देना कानूनी जूर्म है| बिना रजिस्ट्रेशन किये अल्ट्रासाउंड जैसी मशीन का इस्तमाल करना भी जुर्म है|

भ्रूण की लिंग की जांच की विरोध करने के बारे में हर अस्पताल के मुख्य द्वार पे इश्तेहार देना अनिवार्य है|

कन्या भ्रूण ह्त्या के खिलाफ बनी क़ानून का उलंघन करने पर सज़ा

पहली बार क़ानून की उल्लंघन करने पर 3 साल की कैद वो 50000 रुपये तक का जुर्माना भी हो सकता है| कानून का दोबारा उल्लंघन करने पर 5 साल की कैद व 1 लाख रूपए तक का जुर्माना का व्यवस्था भी है|

अस्पतालों व क्लीनिको को लिंग की जांच करने में दोषी पाने पर उनका मेडिकल लाइसेंस को रद्द करने का व्यवस्था है|

कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए उठाये गए कदम: जानिए कोशिश की ऊँचाई: Steps Taken To Stop Female Foeticide:

कन्या भ्रूण हत्या देश की मानव समाज में स्त्री व पुरुष की जनसंख्या में भारी अंतर पैदा कर रहा है|

इसे रोकने के लिए कई एहम कदम भी उठाये गए हें, जैसे की देश की पहेली माहिला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने पिछले वर्ष गांधी जी की 138वी जयंती में केंद्रीय स्वास्थिय और परिवार कल्याण मनत्रालय की बालिका बचाओ योजना को लांच किया था|

हिमाचल प्रदेश जैसी छोटी राज्यों में सेक्स- रेश्यो की सुधार के लिए सरकार ने एक अनोखी स्कीम निकाली है, जिसके तहत गर्व में पलते लिंग की जांच व ह्त्या करने वालो की खबर देने वाले को सरकार के तरफ से 10 हजार रुपये की इनाम दिया जायेगा|

11वी पंच वर्षीय योजना में भ्रुण हत्या को रोकने के लिए रोड मैप तैयार हुआ था| पालनघर बनाकर नवजात शिशुओं की परवरिश, और उन्के शिक्षा की पूरी खर्च उठाने की योजनाए बन चुकी है|

कन्या भ्रूण हत्या को कैसे रोकें: How to stop Female Foeticide in Hindi:

शिक्षा, स्वास्थिय और शसक्तिकरण के अधिकार हर स्त्री की मौलिक अधिकार है | सामाजिक सोच में एक क्रांतिकारी परिवर्तान किये बिना कन्या भ्रूण ह्त्या को रोकना लगभग असंभव है| इस विषय में सज़ा से अधिक सामाजिक जागरूकता की आवश्यकता है |

कन्या भ्रूण ह्त्या को नियंत्रण करना हम जैसे नागरिक के ही वश में है| तो आइए कन्या भ्रूण हत्या को जड़ से मिटाने की एक अनमोल प्रयाश करते हें|

कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए हमे सबसे पहले लड़कियों के प्रति हमारी सोच और नजरिया को बदलना होगा| हमें लड़कियों की ईज्ज़त कर उन्हें लड़कों के बराबर समझना होगा|

कन्या भ्रूण हत्या को जन्माने वाले ‘दहेज प्रथा’ और ‘लड़का लड़की में अंतर’ वाली मुद्दों को जड़ से उखाड़ फेंकना होगा| हमें लड़कियों के लिए अपने समाज में एक सुरक्षित वातावरण बनाना होगा जहां कोई भेद भाव और कोई दक्कियानूसी सोच को कोई जगह न मिले|

कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए सबसे पहले हमें अपने आप की सोच को बदलना होगा| और बस ये असामाजिक रिती अपने आप ही रुक जाएगी|

कन्या भ्रूण हत्या निबंध पर अंतिम चर्चा: Conclusion On Female Foeticide:

कन्या भ्रूण हत्या एक गंभीर चर्चा की विषय है | लेकिन आज तक इस चर्चा का कोई सुपरिणाम निकल के नहीं आ रहा है | चलिए आज ये ठान लें की लिंग परिक्षण व गर्व पात के खिलाफ हमेशा खड़े रहेंगे और अपने समाज को इससे फैलती अनियमितता से बचाएंगे |

अगर आपको हमारे द्वारा लिखित कन्या भ्रूण हत्या पर निबंध को पसंद आया है , तो इस आर्टिकल को ज्यदा से ज्यादा लोगों को शैर करें ताकि कन्या भ्रुण हत्या पर रोक लगाने कि एक मुहिम चल सके |

अगर आपके कन्या भ्रूण हत्या पर कोई निजी विचार हें, तो निचे कमेंट बॉक्स में हमे जरुर बताएं| 

तो फिर आइए बेटियों को बेटो के समान दर्ज़ा देने की एक मुहीम छेड़ें और समाज में जन संतुलन बनाने में एक खास रोल निभाए| अपना सुझाव हमे निचे कमेंट बॉक्स में जरुर दे| आपकी सुझाव हमें इस तरह की असामाजिक विषयों के बारे में लिखने में मदद करता है जो की हमारे समाज में जागरूकता फैलाने में काफी हद तक मददगार भी है|